जानिए क्यों मनाई जाती है नवरात्रि ? चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि इनके बीच क्या अंतर है !

Navratri Day 1 Durga Mata

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर से शुरू हो रही है और इस बार नवरात्रि के दौरान एक बहुत ही शुभ संयोग बन रहा है। मां दुर्गा के आगमन के लिए नौ दिनों के इस पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं। नवरात्रि 3 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक मनाई जाएगी और इसके बाद 12 अक्टूबर को दशहरा का पर्व मनाया जाएगा।

इस वर्ष शरद नवरात्रि के 9 दिनों के रंग इस प्रकार हैं:

  • दिन 1 (3 अक्टूबर 2024) – पीला
  • दिन 2 (4 अक्टूबर 2024) – हरा
  • दिन 3 (5 अक्टूबर 2024) – भूरा
  • दिन 4 (6 अक्टूबर 2024) – नारंगी
  • दिन 5 (7 अक्टूबर 2024) – सफेद
  • दिन 6 (8 अक्टूबर 2024) – लाल
  • दिन 7 (9 अक्टूबर 2024) – रॉयल ब्लू
  • दिन 8 (10 अक्टूबर 2024) – गुलाबी
  • दिन 9 (11 अक्टूबर 2024) – बैंगनी

दशहरा या विजयदशमी की तिथि इस वर्ष 12 अक्टूबर (शनिवार) को है।

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में अंतर

नवरात्रि का पर्व साल में चार बार मनाया जाता है। पहली नवरात्रि चैत्र महीने में होती है, जिसे चैत्र नवरात्रि कहा जाता है। इस नवरात्रि के साथ हिंदू नव वर्ष की शुरुआत भी होती है। दूसरी नवरात्रि आश्विन माह में आती है, जिसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। इसके अलावा पौष और आषाढ़ महीनों में गुप्त नवरात्रि भी आती हैं, जिसमें मुख्य रूप से तंत्र साधना की जाती है। लेकिन आम गृहस्थ लोगों के लिए चैत्र और शारदीय नवरात्रि का महत्व अधिक है। इन दोनों नवरात्रियों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

चैत्र नवरात्रि मनाने का कारण

एक कथा के अनुसार, जब धरती पर महिषासुर का आतंक बढ़ गया था और देवता भी उसे हराने में असमर्थ हो गए थे, तो उन्होंने माता पार्वती की आराधना की। मां ने अपने नौ रूप प्रकट किए और देवताओं ने उन्हें अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। यह घटनाक्रम चैत्र महीने में हुआ, और तब से इन नौ दिनों को चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।

दूसरी कथा भगवान राम से जुड़ी है। रावण से युद्ध से पहले, भगवान राम ने नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना और व्रत किया था। इसके बाद उन्होंने विजय प्राप्त की और इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिन को विशेष रूप से राम नवमी के रूप में भी मनाया जाता है।

शारदीय नवरात्रि का महत्व

आश्विन महीने में देवी दुर्गा ने महिषासुर से नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसे पराजित कर दिया। इसी कारण शारदीय नवरात्रि शक्ति की आराधना के लिए समर्पित है। चूंकि यह समय शरद ऋतु का प्रारंभ भी है, इसलिए इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। दसवें दिन को विजयदशमी या दशहरा के रूप में मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

अन्य भिन्नताएं

– चैत्र नवरात्रि में कठिन साधना और व्रत का विशेष महत्व होता है, जबकि शारदीय नवरात्रि उत्सव, नृत्य और आनंद का समय होता है। चैत्र नवरात्रि का महत्व महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, और कर्नाटक में अधिक है, जबकि शारदीय नवरात्रि गुजरात और पश्चिम बंगाल में विशेष रूप से मनाई जाती है। बंगाल में दुर्गा पूजा का पर्व और गुजरात में गरबा के आयोजन के साथ इस त्योहार का महत्व बढ़ जाता है।

– चैत्र नवरात्रि के अंत में राम नवमी का पर्व मनाया जाता है, जो भगवान राम के जन्म का दिन माना जाता है। शारदीय नवरात्रि के अंत में महानवमी होती है, और इसके बाद विजयदशमी आती है, जिस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था।

नवरात्रि व्रत का महत्व

नवरात्रि के दौरान उपवास रखने का भी धार्मिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्व है। नौ दिनों तक कम भोजन करने से शरीर का संतुलन बना रहता है और इसे शारीरिक और मानसिक शुद्धिकरण का समय माना जाता है।

राम की चंडी पूजा और नील कमल की कथा

कहते हैं कि भगवान राम ने रावण से युद्ध से पहले चंडी पूजा की थी। पूजा के दौरान उन्हें 108 नीलकमल चढ़ाने थे, लेकिन रावण ने अपनी मायावी शक्तियों से एक कमल गायब कर दिया। तब राम ने अपनी एक आंख चढ़ाने का निर्णय लिया। उनकी इस भक्ति से मां चंडी प्रसन्न हुईं और उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया।

निष्कर्ष

चैत्र और शारदीय नवरात्रि दोनों ही मां दुर्गा की आराधना के पर्व हैं, लेकिन इनके पीछे की कथाएं और मान्यताएं अलग-अलग हैं। एक ओर चैत्र नवरात्रि आत्मिक शांति और साधना का पर्व है, तो दूसरी ओर शारदीय नवरात्रि संसारिक सुख और शक्ति की पूजा का प्रतीक है। दोनों नवरात्रियों का अपना महत्व है और ये समाज में अध्यात्म और शक्ति के संदेश को फैलाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *